राजस्थान की प्रमुख सभ्यताएँ
राजस्थान, अपनी समृद्ध और प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है। इस राज्य में कई प्राचीन सभ्यताएँ विकसित हुईं, जिनमें ताम्र-कांस्य सभ्यता और सिन्धु सरस्वती सभ्यता की प्रमुखता है। इन सभ्यताओं के प्रमुख स्थल आज भी राजस्थान के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। इस ब्लॉग में हम राजस्थान की प्रमुख सभ्यताओं के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे, विशेष रूप से कालीबंगा, पीलीबंगा, तरखान वाला डेरा और करणपुरा के बारे में।
1. राज में ताम्र-कांस्य सभ्यता
राजस्थान में ताम्र-कांस्य सभ्यता के महत्वपूर्ण स्थल पाए गए हैं। इन स्थलों से यह स्पष्ट होता है कि यहां की प्राचीन सभ्यताएँ समृद्ध और विकासशील थीं। विशेष रूप से कालीबंगा, पीलीबंगा, तरखान वाला डेरा, और करणपुरा इस सभ्यता के प्रमुख स्थल हैं।
सिन्धु सरस्वती सभ्यता के प्रतिनिधि स्थल
① कालीबंगा (हनुमानगढ़)
शाब्दिक अर्थ: "काली चूड़ियाँ"
स्थिति: यह स्थल हनुमानगढ़ जिले में स्थित है, जो घग्घर नदी के बायें तट पर है।
खोज: कालीबंगा की खोज 1952 ई. में हुई थी।
खोजकर्ता: इस स्थल की खोज अमलानंद घोष ने की थी।
उत्खनन: कालीबंगा में उत्खनन का कार्य 1961 से 1969 के बीच बी. बी. लाल, बी. के. धापर, एम. डी. खरे और जगपति जोशी द्वारा किया गया।
कालक्रम: कालीबंगा से प्राप्त अवशेषों के अनुसार, यह स्थल 2350-1750 BCE के बीच विकसित हुआ था। (कार्बन डेटिंग पद्धति के आधार पर)
विशेषताएँ
- नगरीय सभ्यता
- ताम्र-कांस्य सभ्यता
- मातृसत्तात्मक व्यवस्था का संकेत
- व्यापार प्रधान सभ्यता
- साक्षर सभ्यता
नोट: इस स्थल को सबसे पहले भाषा शास्त्री एल. पी. टैस्सीटोरी ने खोजा और इसे प्रागैतिहासिक स्थल माना।
कालीबंगा में खोजे गए प्रमुख अवशेष
1. विकसित और प्राक् हड़प्पा सभ्यता
कालीबंगा के उत्खनन में प्राक् हड़प्पा और विकसित हड़प्पा सभ्यताओं के अवशेष प्राप्त हुए हैं। प्राक् हड़प्पा संस्कृति के अवशेषों में विशेष रूप से हल रेखाओं से जुड़ी दोहरी फसलों के संकेत मिले हैं। यह स्थल संभवतः भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुआ था, जिसके बाद दुर्ग टीले का निर्माण किया गया।
2. नगर नियोजन
कालीबंगा में एक सुनियोजित नगर का पता चलता है, जो दो टीलों में विभक्त था:
- पश्चिमी टीला (दुर्ग, कोट, गढ़ी): यहां संभ्रांत वर्ग का निवास था।
- पूर्वी टीला (नगर टीला): इसे निचला टीला भी कहा जाता है, और यह सामान्य जन के निवास के लिए था।
3. गढ़ी क्षेत्र
गढ़ी क्षेत्र में चारों दिशाओं में प्रवेश द्वार थे। इसके दक्षिणी द्वार के पास दो आरंक्षक कक्ष पाए गए। यहां सुरक्षा दीवार का निर्माण कच्ची ईंटों से किया गया था।
4. भवन निर्माण
कालीबंगा में कच्ची ईंटों से बने मकान मिले हैं, जो यह संकेत देते हैं कि यह एक गरीब बस्ती रही होगी। इन भवनों में 4-5 कमरे, रसोईघर, स्नानागार और कुआं पाए गए हैं। इन भवनों में एक पल्ले के दरवाजे लगाए गए थे और निजता की सुरक्षा के लिए पहली मंजिल पर खिड़कियाँ नहीं बनाई गई थीं।
5. कालीबंगा में शवाधान
कालीबंगा से कुल 37 शव विसर्जन के उदाहरण मिले हैं, जिनमें विभिन्न प्रकार की शव विसर्जन विधियाँ शामिल हैं:
- पूर्ण समाधिकरण (सबसे अधिक सामान्य)
- आंशिक समाधिकरण
- दाह संस्कार
अवशेष:
- अंडाकार गड्ढों में कंकाल और मृदभांड के अवशेष मिले हैं।
- आयताकार गड्ढों में सामग्री तो मिली, लेकिन अस्थि अवशेष नहीं पाए गए।
- गोल गड्ढों में भी केवल सामग्री पाई गई, अस्थि अवशेष नहीं मिले।
6. अन्य प्राप्त सामग्री
कालीबंगा से कई अन्य महत्वपूर्ण सामग्री भी प्राप्त हुई हैं, जिनसे उस समय की संस्कृति और व्यापारिक संबंधों के बारे में जानकारी मिलती है:
- बेलनाकार मुहर: यह मुहर मेसोपोटामिया सभ्यता से संबंधित है, जो कालीबंगा के व्यापारिक संबंधों की पुष्टि करती है।
- वृषभ की आकृति और ऊंट की हड्डियाँ (प्राक् कालीबंगा स्तर से)।
- एक कब्र से तांबे का दर्पण मिला है।
- एक बच्चे की खोपड़ी में 6 छेद पाए गए हैं, जो शल्य क्रिया की ओर इशारा करते हैं।
7. कालीबंगा का सांस्कृतिक महत्व
कालीबंगा, एक महत्वपूर्ण प्राचीन नगर होने के साथ-साथ इस क्षेत्र में व्यापार, संस्कृति, और समाज की समृद्धि को दर्शाता है। यहां मिले अवशेषों से यह भी पता चलता है कि कालीबंगा की सभ्यता में सामाजिक वर्गीकरण, नगर नियोजन, कृषि विकास, और धार्मिक आस्थाएँ प्रबल थीं।
राजस्थान की यह प्राचीन सभ्यताएँ आज भी हमें उनके विकास, कला, और संस्कृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती हैं। कालीबंगा, पीलीबंगा, तरखान वाला डेरा और करणपुरा जैसे स्थल राजस्थान के ऐतिहासिक महत्व को उजागर करते हैं और भारतीय उपमहाद्वीप की प्राचीन सभ्यताओं के बारे में महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं।
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