आधुनिक राजस्थान में ब्रिटिश साम्राज्य का आधिपत्य
ब्रिटिश साम्राज्य ने भारतीय उपमहाद्वीप पर लंबे समय तक शासन किया। 19वीं सदी के प्रारंभ में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (EIC) ने राजस्थान में अपने प्रभाव को बढ़ाया, और राजस्थान के विभिन्न हिस्सों को अपने अधीन कर लिया। इस ब्लॉग में हम राजस्थान में ब्रिटिश साम्राज्य के आधिपत्य के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को देखेंगे, जिसमें प्रमुख सैन्य बटालियनों का गठन और ब्रिटिश शासन के प्रभाव को समझने का प्रयास करेंगे।
1. ब्रिटिश साम्राज्य का राजस्थान में आगमन:
ईस्ट इंडिया कंपनी और दौलत राब सिधिया
1818 ई. में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने दौलत राब सिधिया से अजमेर को जीत लिया। यह घटना राजस्थान में ब्रिटिश साम्राज्य के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है। इस जीत के बाद, ब्रिटिशों ने राजस्थान के अन्य हिस्सों में भी अपने साम्राज्य का विस्तार करना शुरू किया।
2. अजमेर कमीशनरी का गठन:
विलियम बैटिंग का शासन और अजमेर का महत्व
1832 ई. में, विलियम बैटिंग के काल में अजमेर कमीशनरी का गठन किया गया। यह ब्रिटिश प्रशासन की एक महत्वपूर्ण पहल थी, जिससे राजस्थान में ब्रिटिश शासन को और मजबूत किया गया। इस कमीशनरी के माध्यम से ब्रिटिश प्रशासन ने राजस्थान के अंदर अपने प्रभाव को स्थापित किया और शासन की नीति को लागू किया।
3. ब्रिटिश शासन के प्रमुख प्रतिनिधि और उनका कार्यकाल:
मि. लॉकेट (IAGG) का योगदान
ब्रिटिश साम्राज्य का प्रशासन पूरी तरह से एक सैन्य और राजनीतिक मशीनरी पर निर्भर था। मि. लॉकेट को गर्वनर जनरल का प्रतिनिधि नियुक्त किया गया, और उनका मुख्य कार्य ब्रिटिश नीति को प्रभावी ढंग से लागू करना था। उनकी अध्यक्षता में, ब्रिटिश शासन ने राजस्थान में अपनी स्थिति को मजबूती से स्थापित किया।
4. ब्रिटिश सैन्य बटालियनों का गठन:
ब्रिटिश साम्राज्य ने राजस्थान में सैन्य बटालियनों का गठन किया, जो साम्राज्य की सुरक्षा और शक्ति को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण थे। इन बटालियनों में कई महत्वपूर्ण यूनिट्स शामिल थीं, जिनमें मेर बटालियन, शेखावाटी बिग्रेड, जोधपुर लीजियन, और कोटा कन्टिनजेट प्रमुख थीं। इन बटालियनों का गठन और उनकी गतिविधियाँ इस समय के ब्रिटिश प्रशासन का अहम हिस्सा थीं।
4.1. मेर बटालियन:
स्थापना और मुख्यालय:
मेर बटालियन की स्थापना 1822-23 ई. में की गई और इसका मुख्यालय ब्यावर छावनी (अजमेर) में था। यह बटालियन 1857 के विद्रोह में शामिल नहीं थी, जो इसे एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक बटालियन बनाता है।
4.2. शेखावाटी बिग्रेड:
स्थापना और उद्देश्य:
1834 में शेखावाटी बिग्रेड की स्थापना की गई, और इसका मुख्यालय झुंझुनू में था। इस बटालियन का गठन चोरी और डकैती रोकने के उद्देश्य से किया गया था। मेजर हेनरी फोस्टर की अध्यक्षता में इस बटालियन ने राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में कानून और व्यवस्था को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
4.3. जोधपुर लीजियन:
स्थापना और उद्देश्य:
जोधपुर लीजियन की स्थापना 1835 ई. में एरिनपुरा (पाली) में की गई थी। यह बटालियन मारवाड़ (जोधपुर) के घुड़सवारों की अकुशलता का बहाना लेकर बनाई गई थी। इस बटालियन का उद्देश्य स्थानीय क्षेत्र में ब्रिटिश शासन की शक्ति को और बढ़ाना था।
4.4. कोटा कन्टिनजेट:
स्थापना और अन्य विवरण:
कोटा कन्टिनजेट 1838 ई. में गठित किया गया था। इसके अलावा, अन्य कन्टिनजेट जैसे नीमच (मध्य प्रदेश), देवली (टोंक), और आगरा में भी सैन्य बलों की तैनाती की गई थी, जो ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार और स्थायित्व को सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए थे।
4.5. मेवाड़-भील कोर:
स्थापना और उद्देश्य:
1841 ई. में मेवाड़-भील कोर की स्थापना खैरखाड़ा (उदयपुर) में की गई थी। इस बटालियन का गठन मेवाड़ और भील जनजातियों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से किया गया था। इस बटालियन ने 1857 की क्रांति में भाग नहीं लिया, लेकिन इसका ब्रिटिश साम्राज्य की स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान था।
5. ब्रिटिश साम्राज्य का ग्रीष्मकालीन मुख्यालय:
आवू में मुख्यालय की स्थापना:
1845 ई. में, ब्रिटिश साम्राज्य का ग्रीष्मकालीन मुख्यालय आवू (आबू) में स्थापित किया गया था। यह मुख्यालय ब्रिटिश प्रशासन के लिए एक रणनीतिक स्थान था, जहां से वे राजस्थान के विभिन्न हिस्सों पर नियंत्रण रखते थे।
आधुनिक राजस्थान में ब्रिटिश साम्राज्य का आधिपत्य न केवल सैन्य दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण था, बल्कि यह सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों का भी कारण बना। ब्रिटिश शासन ने राजस्थान में अपनी सत्ता स्थापित करने के लिए सैन्य बटालियनों का गठन किया, प्रशासनिक सुधार किए, और स्थानीय लोगों के साथ संबंध बनाए। इन घटनाओं ने राजस्थान के इतिहास को प्रभावित किया और ब्रिटिश साम्राज्य के तहत राजस्थान की स्थिति को नई दिशा दी।
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